इस ब्लॉग पर मै आपके साथ ग़ज़ल, गीत, मुक्तक, दोहा, कविता, इत्यादि रचनाएँ साझा करता रहूँगा। Copyright@ मुकेश पाण्डेय "जिगर"
Saturday, November 29, 2025
फिर नई शुरूआत होगी
था बहुत खुशहाल जीवन
व्यंजनों का थाल जीवन
चाह का गुल खिल रहा था
जो भी चाहो मिल रहा था
नाम मेरा चल रहा था
दुश्मनों को खल रहा था
बिजलियों सी धमक मुझमें
सूर्य सी थी चमक मुझमें
एक दिन सहसा गिरा मैं
दर्द औ' दुख से घिरा मैं
वक्त की है मार बंदे,
यूं न थककर हार बंदे
दुख को अपना मान ले तू
दर्द सहना जान ले तू
रात को तू बीतने दे
कुछ उजाला दीखने दे
फिर नई शुरूआत होगी
तुझमें फिर वो बात होगी
@मुकेश पाण्डेय "जिगर"
Wednesday, November 13, 2024
कविता: सहस्त्रार्जुन और लंकेश
कृतवीर्य, पद्मिनी के बेटे
हैहय वंशाधिपति अर्जुन
माहिष्मति नगरी के राजा
दशग्रीवजयी सहस्त्रार्जुन
गुरु दत्तात्रेय से पाया था
वरदान हजार भुजाओं का
तोड़ा था अहंकार जिसने
रण में अनेक राजाओं का
यूं ही जल क्रीड़ा करने में
अपनी शक्ति को झोंक दिया
अपने हजार भुजबल से जिसने
नर्मदजल भी रोक दिया
उस कार्तवीर्य की कीर्ति से
वाकिब थे सारे प्रतिद्वंदी
लंका के पति दशानन को
जिसने था बना लिया बंदी
दादा पुलत्स्य के कहने पर
पोते लंकेश को छोड़ दिया
लेकिन रावण के विश्व विजय
अभियान के मद को तोड़ दिया
@ मुकेश पाण्डेय जिगर
भोजपुरी गीत: करिया चश्मा लगाके गोरिया
करिया चश्मा लगा के गोरिया, चढल टरेनिया में।
देखि खून के दौड़ा तेज भईल, लैकन के धमनियां में।
बाराबंकी से बईठल ऊ, बिन साथी संगतिया।
स्लीपर वाला कोच रहे और, गाड़ी साबरमतिया।
होठवा पर स्माइल लिहले, हथवा में मोबाइल
अपना बार के लट सुलझा के, मारत बा स्टाइल।
आइल रहल बसंत महिनवा, उनका जवनियां में।
देखि खून के दौड़ा...................
गलिया पर करिया तिल वाली, गोर सुरतिया सोहे।
कान में बाली, होठ पे लाली, सबके मनवा मोहे।
जीन्स पेंट और टॉप पहिनके, गोरिया मॉडल लागै।
TC बाबू टिकट न मांगै, आंख सेक के भागैं।
मांगै सब मोबाइल नंबर, गिरके चरनिया में।
देखि खून के दौड़ा..........
ट्रेन सफर आसान भईल जब उनसे मिलल नज़रिया।
ऊ रहली बदलापुर वाली, हम तो मालीपुरिया।
दिल के हाल सुनावे खातिर, जैसे नियरा गईली।
ऊ इंस्पेक्टर पति के अपना, तुरते फोन लगइली
ट्विस्ट नया ऊ ला दिहली ई, प्रेम कहनियां में।
देखि खून के दौड़ा..........
---
Tuesday, November 12, 2024
सहस्त्रबाहु अर्जुन पर कविता
कविता: सहस्त्रार्जुनजी
तलवार, धनुष, त्रिशूल, चक्र
रण में कौशल दिखलाते थे
रावण को बंदी बना लिया
दशग्रीवजयी कहलाते थे
उस चक्र सुदर्शन अवतारी
सातों द्वीपों के विजयी को
शत- शत प्रणाम करते हैं हम
प्रभु कार्तवीर्य अर्जुन जी को
@ मुकेश पाण्डेय जिगर
Wednesday, August 28, 2024
तुम बेटी बन घर में आईं
क्या होते हैं रिश्ते नाते, ये सब तुमने ही सिखाया है।
झेले हैं खुशी से ज़ख्म कई, हंस के हर दर्द छुपाया है।
जब-जब धरती लाचार हुई, असुरों दुष्टों के पापों से।
दुर्गा बनकर संहार किया, दुश्मन को मार भगाया है।
जो कहते थे ये महिलाएं, बस घर के काम के लायक हैं ।
वो नज़र उठा के देखें तुमने, एरोप्लेन उड़ाया है।
था घिरा हुआ अंधियारे से, मेरे मकान का हर कोना।
तुम बेटी बन घर में आईं, खुशियों का दीप जलाया है।
भगवान को देखा है घर में, जो महिला के ही रूप में है।
जब-जब मांगा दर्शन उसने, मां का ही रूप दिखाया है।
@मुकेश पाण्डेय जिगर
Saturday, April 27, 2024
अंतरिक्ष विज्ञान पर गीत (पैरोडी)
आओ बच्चों तुम्हें बताएं बातें हम विज्ञान की,
रॉकेट, सैटेलाइट वाले अंतरिक्ष के ज्ञान की।
जय हो विक्रम जी, जय हो विक्रम जी -2
टेलिस्कोप ने आसमान का दर्शन हमें कराया है,
और स्पेस शटल ने हमको अंतरिक्ष पहुंचाया है,
इसरो के वैज्ञानिकों ने जग में नाम कमाया है,
चंद्रयान - 3 ने भारत के परचम को लहराया है।
भारत के वैज्ञानिकों के मान और सम्मान की,
रॉकेट सैटेलाइट वाले अंतरिक्ष की ज्ञान की।
उन्नीस सौ पचहत्तर में जब आर्यभट्ट को छोड़ा था,
कोसमोस - 3 एम. वाहन ने धरती अंबर जोड़ा था,
भारत की इस उपलब्धि ने दुनिया का भ्रम तोड़ा था,
अंतरिक्ष की दिशा में हमने अपने रुख को मोड़ा था।
जी. एस. एल. वी., पी. एस. एल. वी. प्रक्षेपण के यान की।
रॉकेट, सैटेलाइट वाले अंतरिक्ष के ज्ञान की।
जय हो विक्रम जी, जय हो विक्रम जी -2
सात समंदर पार भी लोगों से बातें हो जाती हैं,
मौसम के बारे में सारी माहितियाँ मिल जाती हैं,
EDUSAT से शिक्षा की कलियां सारी खिल जाती हैं,
उपग्रहों से कितनी सारी मुश्किल हल हो जाती है।
चंद्रयान, आदित्य, गगन और बातें मंगलयान की,
रॉकेट सैटेलाइट वाले अंतरिक्ष के ज्ञान की।
जय हो विक्रम जी, जय हो विक्रम जी। -2
@ मुकेश पाण्डेय जिगर
Thursday, April 18, 2024
सबसे पहले हो मतदान
शीर्षक: सबसे पहले हो मतदान
लोकतंत्र का है सम्मान
मतदाता का स्वाभिमान
सबसे पहले हो मतदान
उसके बाद ही बाकी काम
लोकतंत्र का पर्व मनाए
मतदाता का फर्ज़ निभाए
बने नागरिक ज़िम्मेदार
जल्दी हो जाएं तैयार
सबसे पहले हो मतदान
उसके बाद ही बाकी काम
7 मई के महापर्व की
बात सभी को बतलाएं
गली मुहल्ले वालों में भी
इस संदेश को फैलाएं
सबसे पहले हो मतदान
उसके बाद ही बाकी काम
अपने हक का मान करें
सौ प्रतिशत मतदान करें
मत से वंचित रह न जाएं
युवा वृद्ध या महिलाएं
सबसे पहले हो मतदान
उसके बाद ही बाकी काम
@मुकेशकुमार पाण्डेय
Wednesday, April 17, 2024
मतदान जागृति स्लोगन
लोकतंत्र का सही सम्मान
हमारा हक और स्वाभिमान
सबसे पहले करो मतदान
उसके बाद बाकी काम
Wednesday, February 14, 2024
गीत : माता पिता
अपने माता - पिता को करें हम नमन,
इनके चरणों में मिलते सभी धाम हैं।
हाथ सर पे जो रख दें तो बन जाएंगे,
जो भी बिगड़े हुए सब तेरे काम हैं ।
जिसकी डाली पे हम तुम खिले फूल बन
वो अनोखा अनूठा सा पौधा है मां।
गोद में जिसकी खेले स्वयं श्री हरी,
देवकी, कौशल्या, यशोदा है मां।
प्रेम मीरा का शबरी की भक्ति है मां,
मिलने आते जिन्हे कृष्ण और राम हैं।
अप्रदर्शित रहा प्यार जिसका सदा,
ज़िंदगी बाग है बागबां हैं पिता।
दे रहा है उड़ाने जो हर ख़्वाब को,
हम परिंदे हैं तो आसमां है पिता।
मुश्किलें ज़िंदगी में बहुत हैं मगर,
है पिता तो हरेक काम आसान है।
जिसने जीवन बिताया है तेरे लिए,
उनका सम्मान कर प्यार से पेश आ।
पूछना मूल्य इनका कभी तू उन्हें,
हैं नही जिनके दुनिया में माता - पिता।
संग मां- बाप हैं तो समझले ये तुम,
संग ईश्वर तुम्हारे सुबह शाम है।
----- मुकेशकुमार पाण्डेय 'जिगर'
Thursday, January 18, 2024
मुक्तक
साथ तू है तो सारा ज़माना रहा, तेरी आंखों में मेरा ठिकाना रहा, हर दिखावे पे भारी तेरी सादगी, सादगी का सदा मैं दिवाना रहा।
Tuesday, December 12, 2023
शिक्षक पर दोहे
दोहे
1
शिक्षा देकर ज्ञान की, जग में ज्योत जलाय।
भाग्यवान को ही मिले, शिक्षक का व्यवसाय।।
2
अपने शिष्यों को सदा, समझो अपना रूप।
भारत के भावी यही, अनुपम और अनूप।।
3
करे परीक्षा में सफल, उसे माहिती मान।
जीवन जो करदे सफल, समझो सच्चा ज्ञान।
मुक्तक: वर्तमान के वर्गखंड से
मुक्तक
अंधियारे को हरने वाला सूरज फिर से निकलेगा।
ज्योत जलेगी ज्ञान की तो अज्ञान मोम सा पिघलेगा।
कोई शिक्षक, कोई लेखक, कोई वैज्ञानिक होगा।
वर्तमान के वर्गखण्ड से भावी भारत निकलेगा।
स्लोगन: पर्यावरण
1.
मत करो इसका हरण
अनमोल है पर्यावरण
2.
पर्यावरण संरक्षित होगा
जीवन तभी सुरक्षित होगा
3.
पर्यावरण बचाना है
जीवन स्वर्ग बनाना है
4.
करते हैं सबका भरण
धरा ,सूर्य ,पर्यावरण
5.
पानी खनिज तत्वों से मां आंचल है भरती पर्यावरण को संतुलित करती है धरती
6.
काट काट कर वृक्ष हम करें न खुद का नाश शुद्ध रखें पर्यावरण शुद्ध मिलेगी श्वास
7.
दुनिया के हर जीव का करें सदा सम्मान
रखे शुद्ध पर्यावरण अपनी मिल्कत मान
8.
निर्भर है एक वृक्ष पर कई जीव की जान
प्राण वायु दे मुफ्त में तू है बड़ा महान
मुकेशकुमार पाण्डेय "जिगर"
Mo. 7874707567
गीत: पर्यावरण है बचाना
गीत: पर्यावरण है बचाना
नदियों में हमने कचरा डाला
नहरें बना दीं गंदा नाला
पानी भी है प्रदूषित, हवा भी है प्रदूषित
पर्यावरण को बिगाड़ा.....
बर्बाद कर डाला - 4
झीलें प्रदूषित, दरिया प्रदूषित
गंगा और यमुना नदियां प्रदूषित
हरे भरे ये खेत भी हमारे
केमिकल वाली खाद से प्रदूषित।
पानी भी है प्रदूषित, हवा भी है प्रदूषित
पर्यावरण को बिगाड़ा
बर्बाद कर डालाजेड- 4
सोलर लगाओ ऊर्जा बचाओ
पौधे लगाओ वर्षा लाओ
पानी बचाओ बिजली बचाओ
ई मोटर गाड़ी घर में लाओ
पानी है शुद्ध रखना, हवा है शुद्ध रखनी
पर्यावरण है बचाना
वादा है निभाना -4
मुकेशकुमार पाण्डेय "जिगर"
Mo.7874707567
Saturday, October 28, 2023
એ સમજ્યા નહિ
મારા હાલાત, એ સમજ્યા નહિ
હૃદયના આઘાત, એ સમજ્યા નહિ
જોયા જીગરના, સફળતાના દિવસો
સંઘર્ષોની રાત, એ સમજ્યા નહિ
ગઝલ કેમ લખવી, પડે છે જીગરને
આંખોની વાત, એ સમજ્યા નહિ
વ્હાલો હતો, બેવફાઈનો બગડો
સાથનો સાત, એ સમજ્યા નહિ
લડતા રહ્યા બસ, ધરમ જાતિઓ પર
માણસની જાત, એ સમજ્યા નહિ
- મુકેશકુમાર પાંડેય "જીગર"
Monday, August 28, 2023
ગીત: રાખડી
રાખડી
ભાવનાના આભમાં અનંત છે આ રાખડી,
લાગણીના મંદિરોની સંત છે આ રાખડી...
બેનની દુવાઓ એના ભાઈને ફળી સદા,
ભાઈને નડે જે એવી આફતો ટળી સદા.
મેઘ પ્રેમનો બનીને આવી રાખડી સદા,
ભાઈ બેનના હૃદયથી વરસી લાગણી સદા.
રાગ દ્વેષના તમસનો અંત છે આ રાખડી,
લાગણીના મંદિરોની સંત છે આ રાખડી...
ભાઈ બેનનું મિલન આ રાખડી કરાવતી,
દોરીઓ આ હાથ, ભાલ, આંગળી મળાવતી.
નાળિયેરી પૂનમે એ પ્રેમ લઈને આવતી,
છોડ થોરનો હટાવી રાતરાણી વાવતી.
વેર ભાવ દૂર કરતી ખંત છે આ રાખડી,
લાગણીના મંદિરોની સંત છે આ રાખડી.
લાગણીની દોરીઓ કદી ના તૂટે હે પ્રભુ,
બેન કોઈ ભાઈ થી કદી ના રૂઠે હે પ્રભુ.
પ્રેમનો ખજાનો આ કદી ના ખૂટે હે પ્રભુ,
સાથ ભાઈ બેનનો કદી ના છૂટે હે પ્રભુ.
ભાઈ બેનના હૃદયનો પંથ છે આ રાખડી,
લાગણીના મંદિરોની સંત છે આ રાખડી.
-- મુકેશકુમાર પાંડેય 'જિગર'
Monday, December 19, 2022
बाल काव्य (चूहा आया -चूहा आया)
चूहा आया- चूहा आया,
बिना बुलाए खुद ही आया।
घर में जाने कहाँ से आया,
कुतर- कुतर कर सब कुछ खाया।
एक पूँछ दो आँखें पाईं,
चार पैर से दौड़ लगाई।
छुप-छुपकर बिल में है रहता,
बिल्ली मौसी से है डरता।
रात हुए जब सब सो जाते,
चूहा जी तब दौड़ लगाते।
गणेशजी की हैं ये सवारी,
मुँह पर मूछें लगती प्यारी।
कागज,कपड़े,फसल,मिठाई,
खाकर के लेते अंगड़ाई।
जो मिल जाए सब कुछ खाते,
मिश्राहारी ये कहलाते।
रोज निराले खेल दिखाते,
चुन्नू मुन्नू को हर्षाते।
@ मुकेशकुमार पाण्डेय
Mo. 7874707567
Email: mukeshpandeyjigar@gmail.com
Tuesday, November 22, 2022
Muktak: wahi to chakradhari hai
वही तो चक्रधारी हैं, वही बंसी बजैया हैं
हैं पालनहार दुनिया के, वही सब के खिवैया हैं
जो दुर्योधन का वैभव त्याग कर खाएं विदुर के घर
वही माधव हैं मोहन हैं वही सबके कन्हैया है
Monday, November 7, 2022
परदेशी परदेशी जाना नही (पैरोडी)
परदेशी- परदेशी जाना नही,
गाँव छोड़ के गाँव छोड़ के,
अपने पुरखों का यारों यही है ठिकाना
इसे याद रखना कहीं भूल न जाना
परदेशी- परदेशी जाना नही.........
हमने शहर को चाहा शहर से प्यार किया
सब कुछ शहर पे यार अपना वार दिया
बन गए परदेशी परदेश का जोग लिया
ना सोचा ना समझा दिल का रोग लिया
अपनी मिट्टी से दिल का रिश्ता निभाना
इसे याद रखना कहीं भूल न जाना
परदेशी- परदेशी जाना नही...........
अपने गांव की याद तुम्हें तड़पाएगी
कुल्हड़ वाली चाय नहीं मिल पाएगी
छोड़के गांव शहर में जो तुम जाओगे
शुद्ध हवा और पानी तक ना पाओगे
अपने खेतों में गेहूं धान उगाना
इसे याद रखना कहीं भूल न जाना
परदेशी- परदेशी जाना नही...........
मई महीने की छुट्टी में आते हैं
जून में वो पंछी बनकर उड़ जाते हैं
मां की आंखों को आंसू दे जाते हैं
जब वो दिवाली में भी घर ना आते हैं
इतना भी क्या है जरूरी पैसा कमाना
इसे याद रखना कहीं भूल न जाना
परदेशी- परदेशी जाना नही...........
सच कहते हैं दुनिया वाले छोड़ न घर
शहरों की वायु में भी फैला है जहर
परदेशी की किस्मत में तन्हाई है
रोकर जाने कितनी रात बिताई है
शहरों से आगे अपने गांव को बढ़ाना
इसे याद रखना कहीं भूल न जाना
परदेशी- परदेशी जाना नही...........
मुकेश पाण्डेय जिगर
मो. 7874707567
Saturday, August 27, 2022
बड़े भाई को जन्मदिन की बधाई पर शायरी
हर फर्ज है निभाया,हर रीत है निभाई,
सौभाग्य से मिलता है,आप जैसा भाई।
आप सदा खुश रहें,स्वस्थ रहें मस्त रहें,
जन्मदिन की भैया बहुत-बहुत बधाई।
@ मुकेश पाण्डेय जिगर
Subscribe to:
Posts (Atom)